Monday, March 20, 2017

गौरैया..!!

वह थी मेरे बचपन की साथी,
वोह आती और चुहल लाती,
मेरे झरोखे पर थी रोज गुनगुनाती !



जाने कहाँ चली गयी और,
ले गयी मेरा बचपन अपने साथ !

आज भी मुझे है उसकी एक आहट का इंतज़ार,
शायद फिर मिले मुझे उसका प्यार !!

Wednesday, September 16, 2015

नज़ीब..!!

ख़ुशी सदा से ही  है गम के करीब,
सिर्फ ख़ुशी से हो रूबरू तो है वाज़िब  लगना अजीब |

मिला गम जो अगर, तो समझो है वो इंसा खुशनसीब,
भले ही ना रखे हिसाब, वो जो है तेरा रकीब |

बस लगाता जा तू जीने की हर  वो तरकीब,
क्योंकि तू ही है मालिक उसका, जिसे कहते हैं नज़ीब |

Sunday, April 13, 2014

अश्क..!!

ये जो  बहता पानी है,
इसकी अपनी एक कहानी है,,!!

गर लोग समझ गए इनको तो ठीक,
वरना ये सब बेमानी है..!!

वैसे तो इनको अश्क़ कहते हैं,
बस जरा से रूहानी हैं..!! 

Saturday, September 28, 2013

मुख और मुखौटे..!!


वो कहते है ना,
पानी के गहराई समझने के लिए पानी मैं उतरना पड़ता है,
ठीक वैसे ही,
चेहरों  की सच्चाई के लिए, इंसानों को जरा नीचे उतारना पड़ता है
समय का चक्र घूमता है और मुखौटे उतरते हैं, परत दर परत.
बस अपने चक्षु खुले रखो और बदलते हुए वक़्त का आनंद लो,
मुखोटे कभी नहीं बदलेंगे, अगर खुशकिस्मत रहे तो शायद कुछ नए चेहरे देख लो  ..!!

Thursday, February 21, 2013

सिफ़र से शिखर...!!

हर वो इन्सा जो आपके आस पास है,
शायद आप न समझें की वो कुछ ख़ास है,

सबकी अपनी इक अदा,
सबका अपना एक ख़ास अंदाज़ है,

हर इक मेहनतकश का,
एक पुख्ता और मजबूत विश्वास है,

आप इसे मानें या मानें,
सिफ़र से शिखर का सफ़र,

किसी की दी हुई भीख नहीं,
ना ही किसी की दया का मोहताज़ है,

किसी और की सोच का नहीं,
सिर्फ और सिर्फ हमारे अन्तर्मन का एहसास है |

Saturday, December 29, 2012

रक्तबीज ..!!

क्या किसी एक को मिटा देने से,
मिट जायेगा इस ज़ेहन से

ये दर्द, अन्दर पलता गुस्सा,  यह खीज,
जब पल रहे हैं हर गली, हर कसबे में,
ऐसे कई रक्तबीज ..!

कौन बचाएगा जब हम पार करेंगे,
अपने अपने घरों की देहलीज़,
जहाँ हर तरफ फैले हैं,
ऐसे कई रक्तबीज ..!

क्यों आखिर क्यों,
हैं अब तक हर तरफ,
हैं रेंगते, किसी मौके की तलाश में,
इंसानियत के दामन के दाग,
ऐसे कई रक्तबीज ..!

Friday, August 17, 2012

आज....!!

इन सतपुड़ा  के जंगलों के बीच,
टप टप टपकती बूंदों में खड़े रह कर,

लगा शायद भूल चला हूँ,
वो दूर से आती हुई बारिश की आवाज़,
भीगे पत्तों पर बिखरी मुस्कराहट,
कल कल बहते झरनों का साज,


बदलते लगते हैं सबके कल और आज,
और अनजाना सा ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ |