बिखरा हुआ था बरसों से, आज जा कर सिमटा हूँ मैं तेरे दामन मैं,
वो जो तेरी बिखरी जुल्फें थी, वही तो मेरा दायरा बन गयीं..!!
Thursday, April 15, 2021
दायरा ..!!
Tuesday, March 16, 2021
मौला..!!
जब चुराना चाहो ख़ुशी से दो लम्हे, लगता है की ज़िन्दगी साथ नहीं देगी
जब चुराना चाहो मुस्कराहट के दो लम्हे, लगता है की कायनात साथ नहीं देगी
बिना गलती के मिली हुई सजा, मौत से भी बदतर महसूस होती है
तू ही बता दे मौला, क्या अब तेरी बन्दगी भी साथ नहीं देगी ?
Sunday, September 27, 2020
सच क्या है ?
जो दिखता है वह सच है,
या जो बिकता है वह सच है ?
जो तेरा है वह सच है,
या जो मेरा है वह सच है ?
जो अंदर है वह सच है,
या जो बाहर है वह सच है ?
या फिर जो दिखने, बिकने, अंदर, बाहर, तेरे और मेरे से परे है,
वही एक सच है, बस वही एक सच है..!!
आँचल..!!
रास्ते के कंकड़ और मेरी थकान,
रोज़ की गहमागहमी और दूर कहीं मकाम,
ज़िन्दगी की जद्दोजेहद से पार के,
पैरों के छालों की टीस से हार के,
ना बदली की छाया और ना छॉव बाग बहार के,
तेरे पास आया हूँ माँ, भर ले अपने आँचल में....ममता भरे प्यार से..!!
Sunday, September 13, 2020
बचपन का आंगन..!!
वो छत और वो आसमान खुला, वो दिन रात बहती ठंडी हवा,
वो सतपुड़ा का घना जंगल, उस जंगल में प्रकृति का दंगल,
वो बगीचे का अमरुद, जामुन और बेल का फल,
वहां गुजारा हुआ बचपन और उससे जुड़े हुए सारे पल,
आज बैठे हुए याद करता हूँ वो सब, आज कल हर पल |
Wednesday, December 25, 2019
असरार..!!
उनको गुमान हैं अपने इख्तियार पे, जो मेरे सबात पर सवाल उठाते हैं,
वो भी एक अहद था जब फैज़ था उनकी इमदाद में, पर उस फुरकत ने हमें भी अघ्यार कर दिया,
उनको यकीन है मेरे कातिल होने का, पर.. सुन लो ये, की जान अभी बाक़ी है...तेरे आने तक। ..!!
Tuesday, June 26, 2018
चलते चलते..!!
जर्रा सा खोया और जाने क्या क्या पाता गया हूँ,
खोने का गम नहीं पर पाने का एहसास भुलाता सा चला गया हूँ !
सब से बहुत सा सीखा और शायद सबको जरा सा सिखा गया हूँ,
अपने होने के एहसास को हे कृष्णा, सबको जताता गया हूँ !
जिस वक्त ने आजकल जो चुप्पी साध रखी है,
अब तो वह भी यही बोलेगा मुझ से मिल के,
क्या बनाना था इसको और क्या बना गया हूँ !!